जलते चिराग..

जलते चिराग़ों से कह दो, कहीं और जा के जलें ,
ख़ुशी बहुत है यहां जलने वालों का काम नहीं…

……….✍️ गीता………

Comments

12 responses to “जलते चिराग..”

  1. बिल्कुल उचित पंक्तियां लिखी हैं आपने। वाह वाह

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद आपका रमेश जी 🙏

  2. वाह बहुत खूब, शानदार लेखन क्षमता

    1. Geeta kumari

      बहुत शुक्रिया पीयूष जी 🙏

  3. ख़ुशी बहुत है यहां जलने वालों का काम नहीं… वाह वाह क्या बात है।
    जमाना लाख कोशिश करे, लेकिन खुशमिजाज सदैव बिंदास रहते हैं।

    1. Geeta kumari

      इस सुन्दर समीक्षा हेतु आपका बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी। आपकी यही प्रेरणादयक समीक्षाएं बहुत उत्साह वर्धन करती हैं। अभिवादन सर 🙏

    1. Geeta kumari

      सादर धन्यवाद भाई जी 🙏

  4. Seema Chaudhary

    बेहतरीन प्रस्तुति

  5. Geeta kumari

    Thank you

  6. बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

    1. Geeta kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

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