जागो हे भरतवंशी

जागो हे भरतवंशी अलसाने की बेर नहीं ।
सहा सबकी साज़िशों को,करना है अब देर नहीं ।।
शालीनता की जिनको कदर नहीं,विष के दाँत छिपाये है
मौकापरस्त फितरत है जिनके,क्यू उनसे हम घबराये है
फ़ौलाद बन उत्तर दो इनको,पंचशील की बेर नहीं
जागो हे भरत——
सामने शत्रु है वो,वृतासुर सी प्रवृत्ति जिनकी रही है
हिन्द के सह से वीटो की छङी,जिनके हाथों में पङी है
दधीची बन, भेद उनको,बुद्ध की अभी दरकार नहीं
जागो हे भरत——-
चुपचाप तुम्हारी मनमानी को करते रहे स्वीकार जो
हिंद -चीन भाई-भाई कह,कर ना सके प्रतिकार जो
तेरी कायराना हरकतें सहने को, अब हम तैयार नहीं
जागो हे भरत ——
जो है उसीसे क्यू न अपना आशियाना सजाए हम
अमेरिका कभी रूस से,क्यू हथियार मंगवाए हम
सँवारे एकलव्य,रामानुज,आर्यभट्ट,नागार्जुन कलाम को,
इन जैसो की हिन्द में हङताल नहीं
जागो हे भरत——
चाणक्य को देंगे सम्मान नहीं चन्द्रगुप्त कहाँ से पाएंगे
चीन कभी रूस के आगे हथियार की आश लगाएँगे
द्रोण वशिष्ठ की परम्परा,रखी हमने बरकरार नहीं
जागो हे भरत ——-
पिछङते रहेगे, उपेक्षित रहेगी जबतक,पहली शिक्षिका
कैसे बढ़े,गर्भ में ही भक्षण कर,बन बैठे, हैं जो रक्षिका
ललक शिखर छूने की,
आधी आबादी की करते हैं सम्मान नहीं
जागो हे भरत ——-
सुमन आर्या
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Comments

17 responses to “जागो हे भरतवंशी”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    SunderBhav

    1. Suman Kumari

      धन्यवाद

  2. Antima Goyal Avatar
    Antima Goyal

    nice poetry

    1. Suman Kumari

      धन्यवाद

  3. Saurabh Mittal Avatar
    Saurabh Mittal

    Achi kavita

    1. Suman Kumari

      धन्यवाद

  4. Anshita Sahu Avatar
    Anshita Sahu

    बहुत खूब

    1. Suman Kumari

      धन्यवाद

  5. Shuresh Singh Avatar
    Shuresh Singh

    अनुपम काव्य सर्जन क्षमता है आपमें

    1. Suman Kumari

      बहुत- बहुत धन्यवाद ।

  6. PRAGYA SHUKLA Avatar
    PRAGYA SHUKLA

    Good

    1. Suman Kumari

      बहुत बहुत धन्यवाद

    1. Suman Kumari

      धन्यवाद

    1. Suman Kumari

      धन्यवाद

  7. सुंदर भाव तथा अच्छा प्रयोग

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