रूठ जाते हैं जब
कभी सब अपने
जिंदगी परेशान करती है
भटक जाते हैं जब
राही अपनी मंजिल
जिंदगी इम्तिहान लेती है
बिखरते हैं जब
सपने
अपनों की नजरें ही
हैरान करती है
नहीं दिखता कोई साथी
जिंदगी हैरान करती है
—✍️एकता गुप्ता “काव्या”
जिंदगी हैरान करती है*

Comments
6 responses to “जिंदगी हैरान करती है*”
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अतिसुंदर रचना
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बहुत खूब
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कविता में वास्तविकता साफ झलक रही है।
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बहुत सुंदर
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बहुत सही कहा अपने
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अति सुन्दर रचना
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