जिंदगी है बुलबुला
पानी मे उठता बुलबुला
फूट जाता है अचानक
सत्य को मन मत भुला।
सोचता है आदमी
मैं सौ बरस जीवित रहूँगा,
और कैसे भी रहें,
पर मैं सदा ऐसा रहूँगा।
इस तरह माया के वश में
सच को देता है भुला
एक दिन देता है चल
छोड़ जाता है रुला।
जिंदगी है बुलबुला
Comments
12 responses to “जिंदगी है बुलबुला”
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बहुत खूब
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Thanks ji
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सुन्दर कविता
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Thanks
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Atisunder
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सादर धन्यवाद जी
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जीवन का सत्य इंगित करती रचना
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धन्यवाद जी
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सुन्दर भाव
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धन्यवाद जी
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ज़िन्दगी का यथार्थ चित्रण
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सादर धन्यवाद
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