जिन्दगी ने दिया है तोहफा हो

जिन्दगी ने दिया है तोहफा हो
प्राणों की हरेक सांस हो तुम,
सजा चमन तुम्हीं से आज मेरा,
कल भी जी लेंगे ऐसी आस हो तुम।
जबसे आई, बाहर लाई हो
लुटाती नेह, चली आई हो,
बनी वनिता मगर बनी सब कुछ
रोशनी बन के खूब छाई हो।
गम हों खुशियां हों चाहे कैसे भी
सभी में साथ तुम बराबर हो,
अंग अर्धांगिनी समाहित हो
धर्म सहधर्मिणी सी शोभित हो।
सारे सुख-दुख समेट लेती हो
अपने आँचल में बांध लेती हो,
ऐसे जीवन संभाल लेती हो
एक उफ्फ तक भी नहीं करती हो।
सात फेरों को अग्नि के लेकर
इतना सच्चा स्नेह करती हो,
सात जन्मों में हम न दे सकते
जितना तुम एक में ही देती हो।

Comments

9 responses to “जिन्दगी ने दिया है तोहफा हो”

  1. वाह सहधर्मिणी पर सुन्दर रचना

  2. वाह अतिसुन्दर रचना सर

  3. Geeta kumari

    कवि सतीश जी की उनके जीवन साथी पर बहुत ही खूबसूरत कविता
    “बनी वनिता मगर बनी सब कुछ,रोशनी बन के खूब छाई हो।”
    पत्नी के जीवन में महत्व को समझाती हुई बेहद शानदार रचना
    वाह सर, बहुत सुंदर और सरस रचना और उसकी सुंदर प्रस्तुति

  4. सुंदर रचना

  5. Harish Joshi U.K

    सुन्दर रचना

  6. वाह सर बहुत खूब

  7. वाह सर शानदार

  8. वाह बहुत खूब

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