जिसको जरूरत होती है
वही साथ चलता है
बिन जरूरत वाला तो बस
तनक़ीद करने को ही मिलता है।
अपना मतलब न सोचे
दूसरे की मदद करते वक़्त
आज़ इस दुनियाँ में
ऐसा इंसान कम मिलता है।
जो दूर से दिखाती हैं निगाहें
पास जाकर छानने पर
वही मंजर
हर बार कब मिलता है।
बड़ी–बड़ी नावें
पैदा करती है
दरिया में बहुत भारी हलकम
लेकिन अगर
डूब जाएँ वें कभी
तो उनका नामो–निशान कहां मिलता है।
खुद–ब–खुद
पा लेता है
वो अध्द्भुत औषधि
जो अपने घावों से पहले
दूसरो का जख्म
बखूबी सिलता है।
और
तब क्या गम होगा
किसीके हिज्र का
जब बंदा उसके करीब हो
जिसकी मर्जी बगैर
एक पता भी नहीं हिलता है।
– कुमार बन्टी
जिसको जरूरत होती है….
जिसको जरूरत होती है
वही साथ चलता है
बिन जरूरत वाला तो बस
तनक़ीद करने को ही मिलता है।
अपना मतलब न सोचे
दूसरे की मदद करते वक़्त
आज़ इस दुनियाँ में
ऐसा इंसान कम मिलता है।
जो दूर से दिखाती हैं निगाहें
पास जाकर छानने पर
वही मंजर
हर बार कब मिलता है।
बड़ी–बड़ी नावें
पैदा करती है
दरिया में बहुत भारी हलकम
लेकिन अगर
डूब जाएँ वें कभी
तो उनका नामो–निशान कहां मिलता है।
खुद–ब–खुद
पा लेता है
वो अध्द्भुत औषधि
जो अपने घावों से पहले
दूसरो का जख्म
बखूबी सिलता है।
और
तब क्या गम होगा
किसीके हिज्र का
जब बंदा उसके करीब हो
जिसकी मर्जी बगैर
एक पता भी नहीं हिलता है।
– कुमार बन्टी
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