नारी हो निराशा नहीं,
टूटे ना तेरी आशा कहीं,।
निशा है तो नव – प्रभात भी आएगा ।
तेरी जीत का परचम लहरएगा ।
खोखले, ढकोसले, न तुझे रुलाएं,
खुदी को कर बुलंद इतना,
कि हवा भी पूछ के आए ।
जीत का परचम
Comments
18 responses to “जीत का परचम”
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सुन्दर प्रस्तुति
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धन्यवाद जी
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पता नहीं क्यों लोग
इस कदर दुखी करते हैं
खोखले ढकोसलों से
मन को दुखी करते हैं।-
जी बिल्कुल, लेकिन यदि हम अपनी बेटियों को शिक्षा के माध्यम से बुलंद बना दें तो ये सब कम हो सकता है…… समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद जी 🙏
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बहुत सच्ची पंक्तियाँ लिखी हैं आपने
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सादर धन्यवाद जी 🙏
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अति सुन्दर
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समीक्षा भी अति सुंदर लगी है बहना।
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बहुत खूब
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बहुत शुक्रिया भाई जी 🙏
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नारी निराश नहीं हो सकती है। बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति, लेखनी में काफी क्षमता है आपकी। वाह
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प्रेरणदायक समीक्षा के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद।🙏🙏
यूं ही प्रेरणा देते रहें ।
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Bahut hi sundar
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बहुत सारा धन्यवाद है ईशा जी 💐
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वाह वाह
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Thank you very much Piyush ji 🙏
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नारी हो निराशा नहीं,
very nice-
आपने भाव को बहुत अच्छे से समझा है इन्दु जी समीक्षा हेतु बहुत बहुत धन्यवाद आपका 🙏
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