तू ममतामयी तू जगजननी रहे आँचल तेरा हरा-भरा l
तू पालक है प्राणी मात्र की, हे जीवनदायनी वसुंधरा l
यह रज जो तेरे दामन की, लगती है शीतल चंदन सी,
तू उपासना की पाक ज्योति, तू पावन आरती-वंदन सी ,
तू माँ की ममता सी कोमल तू चाँद-सूरज सी मर्यादित,
तू चेतना की अभिप्राय, कोटि जीवन तुझ पर आश्रित,
तेरा ही ममता का ऋणी है इस सृष्टि का कतरा-कतरा l
तू पालक है प्राणी मात्र की, हे जीवनदायनी वसुंधरा l
जीवनदायनी वसुंधरा
Comments
12 responses to “जीवनदायनी वसुंधरा”
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पृथ्वी दिवस पर बहुत सुन्दर रचना ।
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बहुत बहुत आभार जी
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बहुत सुन्दर रचना
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दिल से आभार आपका .
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सुन्दर रचना
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तह ए दिल से शुक्रिया आपका
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मानव जीवन का अस्तित्व इस धरा से ही है। उम्दा लेखन
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दिल से आभार आपका
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बहुत सुंदर रचना
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दिल से आभार
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बहुत खूब
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तह ए दिल से शुक्रिया जी .
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