जीवनदायनी वसुंधरा

तू ममतामयी तू जगजननी रहे आँचल तेरा हरा-भरा l
तू पालक है प्राणी मात्र की, हे जीवनदायनी वसुंधरा l
यह रज जो तेरे दामन की, लगती है शीतल चंदन सी,
तू उपासना की पाक ज्योति, तू पावन आरती-वंदन सी ,
तू माँ की ममता सी कोमल तू चाँद-सूरज सी मर्यादित,
तू चेतना की अभिप्राय, कोटि जीवन तुझ पर आश्रित,
तेरा ही ममता का ऋणी है इस सृष्टि का कतरा-कतरा l
तू पालक है प्राणी मात्र की, हे जीवनदायनी वसुंधरा l

Comments

12 responses to “जीवनदायनी वसुंधरा”

  1. पृथ्वी दिवस पर बहुत सुन्दर रचना ।

    1. Rakesh Raj Bhatia

      बहुत बहुत आभार जी

  2. बहुत सुन्दर रचना

    1. Rakesh Raj Bhatia

      दिल से आभार आपका .

  3. सुन्दर रचना

    1. Rakesh Raj Bhatia

      तह ए दिल से शुक्रिया आपका

  4. मानव जीवन का अस्तित्व इस धरा से ही है। उम्दा लेखन

    1. Rakesh Raj Bhatia

      दिल से आभार आपका

  5. बहुत सुंदर रचना

    1. Rakesh Raj Bhatia

      दिल से आभार

  6. Pragya Shukla

    बहुत खूब

    1. Rakesh Raj Bhatia

      तह ए दिल से शुक्रिया जी .

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