जीवन शैली क्यों बदल रहे हो

अभी कोरोना खत्म नहीं है,
अभी से घर से क्यों निकल रहे हो।
अभी तो वैक्सीन लगी नहीं है,
बढ़ रहा है यह रोग फ़िर से,
यह बात समझ क्यों नहीं रहे हो।
मास्क भी उतार फेंका,
सामाजिक दूरी भी नहीं है।
ऐसा गजब तुम कर क्यों रहे हो।
अभी कोरोना खत्म नहीं है,
अभी से,जीवन शैली क्यों बदल रहे हो।।
_____✍️गीता

Comments

9 responses to “जीवन शैली क्यों बदल रहे हो”

  1. बिल्कुल सही 👍
    कोरोना के प्रति लापरवाही सही नहीं है।

    1. Geeta kumari

      बहुत-बहुत धन्यवाद सर

  2. वाह बहुत सुंदर रचना। महामारी से बचने का एक मात्र उपाय है,
    सावधानी रखना। कवि गीता जी की कविता उच्चस्तरीय कविता है।

    1. Geeta kumari

      इस सुंदर और प्रेरक समीक्षा हेतु आपका बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी

  3. बहुत सुंदर रचना

    1. Thanks for your precious compliment Kamla ji.

  4. वाह अति उत्तम

    1. Geeta kumari

      सादर धन्यवाद सर 🙏

  5. कोरोना काल मे लापरवाही बिल्कुल सही नहीं है
    सुंदर

Leave a Reply

New Report

Close