जुबां जो कह नहीं सकती
आंखें वो राज़ कहती हैं।
दिल में जो कुछ भी चलता है
धड़कनें आवाज करती हैं ।
लगाए लाख भी पहरे
दिलों पर चाहे जमाना,
मोहब्बत तोड़कर पहरे
दिल को आजाद करती है।
मिले ना दुनिया की शोहरत
सच्चा दिलदार मिल जाए।
जहां में प्यार की दौलत ही
सच में आबाद करती है।
किसी को टूट कर चाहो
अगर वो छोड़ दे दामन,
एक तरफा मोहब्बत ही ‘प्रज्ञा’
जलाकर खाक करती है।
जुबां जो कह नहीं सकती..
Comments
11 responses to “जुबां जो कह नहीं सकती..”
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बड़ी सुंदर रचना
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धन्यवाद
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nice
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Thanks
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थैंक्स
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बहुत खूब
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धन्यवाद आपका
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वाह
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🙏
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Good
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बहुत बढ़िया
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