अभिव्यक्ति ह्रदय से:-
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आज तोड़ दिया तुमने
मेरा टूटा हुआ दिल !
ऐसा लग रहा है जैसे
सीने पर एक पत्थर-सा रखा है मेरे।
एक तुम ही थे
जिससे थोड़ी बहुत उम्मीदें लगा रखी थीं मैंने !
तुमने भी मुंह मोड़कर मुझे
मुंह के बल गिरा दिया।।
टूटा हुआ दिल
Comments
10 responses to “टूटा हुआ दिल”
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वाह, टूटे हुए दिल को भी तोड़ने की गहरी संवेदना व्यक्त हुई है।
“तुमने भी मुंह मोड़कर मुझे
मुंह के बल गिरा दिया।।” में कविता को अनुप्रास से अलंकृत किया गया है। सुन्दर कविता-

धन्यवाद
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अतिसुंदर
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🙏🙏
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अनुप्रास अलंकार से सजी सुंदर रचना ।
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धन्यवाद
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🙏🙏
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Nice lines
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🙏🙏
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