ठंडक की रात है,
आसमान साफ है,
तारे ठिठुर रहे हैं,
लेकिन चाँद छिप गया है
या ओढ़ कर सो गया है
एक पक्ष के लिए।
तारे अकेले रात काट रहे हैं,
सुबह का इंतजार कर रहे हैं
कुछ ही घण्टों में सुबह हो जायेगी,
ठंड भाग जायेगी।
ठंडक की रात है
Comments
4 responses to “ठंडक की रात है”
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बहुत खूब
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बहुत सुंदर पंक्तियां हैं कमला जी, सर्दी पर बहुत सुंदर कविता
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बहुत खूब
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वाह वाह सुंदर
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