सागर किनारे रेत पर फेरी उँगलियाँ,
देखा जो गौर से बन गई तस्वीर तेरी।
ख्वाब से हकीकत में ले आई मुझे,
एक लहर बहा ले गई तक़दीर मेरी।
तक़दीर
Comments
12 responses to “तक़दीर”
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Bahut khub
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शुक्रिया
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वाह बहुत सुंदर रचना
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धन्यवाद
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अच्छा है
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धन्यवाद
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Wah
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शुक्रिया
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Sunder rachna
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धन्यवाद
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Nice
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Thanks
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