लेखनी को पुष्प चढ़ाकर
भाव ह्रदय से सजाकर
ज्ञान का भंडार भरकर
प्रेम – अश्रु के साज से
आज कुछ ऐसा लिखूॅ
गीता लिखूॅ कुरान लिखूॅ
वेद लिखूॅ ग्रन्ध लिखूॅ
राम लिखूॅ – कृष्ण लिखूॅ
सच लिखूॅ या झूठ लिखूॅ
आईने सा स्पष्ट लिखूॅ
आज देश पर छाया जो
दुशमनों का कोहराम है
देश वासियों का हुआ
जीना अब मुहाल है
मिलकर सब भारतवासी
बचा लें अपना मथुरा कासी
अवध और काश्मीर के साथ
माँग लें अपना ननकाणां साहब
और माँग लें अपना सिंध
तभी सही मायने मैं
अपना पूर्ण होगा हिंद
ह्रदय के भाव से
शत्रुओ के घाव से
सैनिक है लड़ रहा
देश की खातिर मर मिट रहा
माँ भारती को शीष नवाकर
शहीदों का सम्मान कर
तिरंगे का मान रखें
भारत की आन रखें
लेखनी को पुष्प चढ़ाकर
आज कुछ ऐसा लिखूॅ
भारत माता की जय
– रीता अरोरा
राष्ट्रीय कवि संगम दिल्ली
राष्ट्रीय जागरण धर्म हमारा
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