तिरंगे के रंग

अपनी हथेली पर शहीदों के नाम की मेंहदी रचाता रहा हूँ मैं,
तिरंगे के रंग में शहादत का रंग मिलाता रहा हूँ मैं,
हार कर सिमट जाते हैं जहाँ हौंसले सभी के,
वहीं हर मौसम में सरहद पर लहराता रहा हूँ मैं,
सो जाती है जहाँ रात भी किसी सैनिक को सुलाने में,
अक्सर उस सैनिक को हर पल जगाता रहा हूँ मैं,
दूर रहकर जो अपनों से चन्द स्वप्नों में मिलते हैं,
उन्हें दिन रात माँ के आँचल का एहसास कराता रहा हूँ मैं॥
राही (अंजाना)

Comments

11 responses to “तिरंगे के रंग”

  1. Puneet Mt Avatar

    हृदय स्पर्शी कविता।।।।

    1. Shakun Saxena Avatar

      धन्यवाद मित्र

      1. Abhishek kumar

        Kya bat

    1. Shakun Saxena Avatar

      थेंक्स जी

  2. Abhishek kumar

    🙏🙏🙏

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