“तिरस्कृत महिला”

तिरस्कृत महिला
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तिरस्कार मनुष्य को
जीवित ही मार देता है
ये वह जहर है जो
धीरे- धीरे असर करता है
शेक्सपियर भी कह गये हैं मित्रों !
“बदला लेने और प्रेम करने में नारी
पुरुष से ज्यादा निर्दयी है”
इसीलिए तो जब
एक महिला तिरस्कृत होती है
तो वह जहरीले नाग से भी
खूंखार होती है
ना देखती है वह फिर रिश्तों का मोह
घायल नारी, द्रौपदी सम होती है
सीता हो या द्रौपदी
इतिहास गवाह है
जब-जब पुरुष ने नारी का तिरस्कार किया है
उसका अस्तित्व मिटा है
तो सम्मान दो और
सम्मानित होने का गौरव पाओ
नारी को तुच्छ नहीं
अपने जीवन का भाग बनाओ…

Comments

7 responses to ““तिरस्कृत महिला””

  1. Geeta kumari

    “बदला लेने और प्रेम करने में नारी पुरुष से ज्यादा निर्दयी है”
    बहुत ख़ूब , सत्य वचन , क्योंकि नारी दिमाग से नहीं दिल से प्रेम करती है तो नफरत भी दिल से ही करती है ।
    यथार्थ अभिव्यक्ति

  2. Virendra sen Avatar

    वर्तमान में नारी पुरुषों से कम नहीं बल्कि उनसे आगे हैं।

    1. बिल्कुल सही कहा आपने सर
      धन्यवाद आपका

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