तुम्हारा तोता

पंछी हूँ
उड़ना चाहता हूँ
पिंजरे में कैद हूँ
इक आज़ाद आसमां चाहता हूँ
माना घर में सुरक्षित हूँ
पर खुद का बनाया घरौंदा चाहता हूँ
जो तुम चाहो वही बोलता हूँ
खुद की भी आज़ाद जुबां चाहता हूँ
यहाँ ख़ामोशी में रहता हूँ
पर साथियों का शोर चाहता हूँ

Comments

7 responses to “तुम्हारा तोता”

  1. सुन्दर रचना

    1. shaily

      धन्यवाद

  2. Satish Pandey

    बहुत खूब

  3. Pratima chaudhary

    बहुत सुंदर।

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