तुम्हारी सादगी ही
तुम्हारी खूबसूरती है,
उस पर
कुछ लिखना चाहता है मन
लेकिन जब तुम सामने होते हो
रुक जाती है कलम
तुम पर ही
टिक जाते हैं नयन।
तुम्हारी सादगी ही
Comments
14 responses to “तुम्हारी सादगी ही”
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बहुत सुंदर
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बहुत बहुत धन्यवाद
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Very nice
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Thank you sir
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Very beautiful poem
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Thanks
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उत्तम
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Thanks
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Very nice
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Thanks
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Nice
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Thanks
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Nice
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Thanks
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