तुम ना होतो जीने
की आस किसे है
तुम होतो
धूप की चादर
भी ओढ़ लेंगे
हम।मलमल के
बिस्तर की
आस किसे है।
तुम ना होतो
Comments
9 responses to “तुम ना होतो”
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जयजयकार
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आभार आपका
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Nice
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आभार
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Good
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शुक्रिया अदा
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Ok
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वाह
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धन्यवाद
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