माखौल कभी मत करना

मेरी जुल्फ को नागिन मत कहना
एक दिन तुमको डस जाएगी।
तीर नजर को मत कहना
तेरे अँखियों में धस जाएगी।।
काली जुल्फे बदली है जो
तुझ पर हीं बरसाएगी।
नजरें मेरी नील कमल जो
तेरे नयनों में बस जाएगी।।
”विनयचंद ‘रे माशूक का माखौल कभी मत करना।
राह-ए-मुहब्बत में एक दिन पछताओगे वरना।।

Comments

6 responses to “माखौल कभी मत करना”

  1. 4000पहुँच गये आप बधाई के पात्र हैं

    1. 13-7 है तो मुझे क्या कमी है।
      बहुत बहुत धन्यवाद

      1. हमें भी सिखायें कुछ आगे बढ़ने के लिए

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