तुलसीदास

तेरे दर्द के बाद सोंचती हूँ मैं
क्यों जन्म दिया ऊपर वाले ने मुझे !!
ठोकर खाने के लिए
या तुलसीदास बनने के लिए !!

Comments

15 responses to “तुलसीदास”

  1. ना मुंह छुपा के जियो
    ना सर झुका के जियो
    गमों का दौर भी आए तो
    मुस्कुरा के जियो

  2. जीवन में कभी कभी मुश्किल वक्त आ जाता है।लेकिन इसे परीक्षा की घड़ी समझ के निकल देना और आगे बढ़ जाना ही बेहतर है।

  3. Praduman Amit

    तुलसीदास तो तुलसीदास थे, गर तुलसीदास न होते ।
    तो हम रामचरितमानस ग्रंथ को कैसे अध्ययन कर पाते।।

    1. सर तुलसीदास का आशय यहाँ
      धोखा खाकर
      कवि बनने से है

      1. Praduman Amit

        मैडम हमने तुलसीदास व रामचरितमानस लिखा जरूर मगर मेरा भाव आपकी शेर से ही मिलता है। आप तुलसीदास व राभचरितमानस के पर्दे से बाहर आएं। आपको जवाब अवश्य मिलेंगे।

  4. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    बहुत ही उम्दा

    1. 🙏🙏
      आभार आपका

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