4 Comments

  1. तेरे रिश्ते की कीमत को,
    वो अपने भाव में समझे|
    तुझे गद्दार कहके वो
    खुद को ठीक ही समझे|
    दूषित है हवा सारी,
    उस पर छाई निराशा है
    भटका है मुसाफिर वह
    उसे तेरी ही आशा है।
    थोड़ा टाइपिंग मिस्टेक है, अन्यथा भाव अतिसुन्दर हैं।

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