तेरी खामोशियां

तेरी खामोशियां आज भी
गीत गाती हैं
लबों पर मेरे
मुस्कान आती हैं
रात थम जाती है
उस वक़्त
जब भी तेरी याद आती है ।।

Comments

14 responses to “तेरी खामोशियां”

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  2. Geeta kumari

    तेरी खामोशियां आज भी
    गीत गाती हैं
    लबों पर मेरे
    _______ बहुत खूब, कवि प्रज्ञा जी की, रूमानियत से भरी हुई सुंदर कविता

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  4. अति सुंदर रचना

  5. बहुत सुंदर

  6. सुन्दर प्रस्तुति

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