तेरी खामोशियां आज भी
गीत गाती हैं
लबों पर मेरे
मुस्कान आती हैं
रात थम जाती है
उस वक़्त
जब भी तेरी याद आती है ।।
तेरी खामोशियां
Comments
14 responses to “तेरी खामोशियां”
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धन्यवाद
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तेरी खामोशियां आज भी
गीत गाती हैं
लबों पर मेरे
_______ बहुत खूब, कवि प्रज्ञा जी की, रूमानियत से भरी हुई सुंदर कविता-

धन्यवाद
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उत्तम
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धन्यवाद
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धन्यवाद
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अति सुंदर रचना
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धन्यवाद
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बहुत सुंदर
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धन्यवाद
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सुन्दर प्रस्तुति
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धन्यवाद
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