तोहमत

औरों की सुनते रहे,
मुझे अपना क्यू न मान सके
तोहमत लगाते, लगवाते रहे
मेरे दिल में क्यूँ न झांक सके

Comments

5 responses to “तोहमत”

  1. 👏👏👏बहुत खूब

  2. बहुत ख़ूब

  3. बहुत खूब, अतिसुन्दर पंक्तियाँ

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