दर्द का जो स्वाद है

दर्द का जो स्वाद है,
उससे दिल आबाद है,
मुफ्त है जग में,
खुदगर्जीया !

मक्कारियां सरेआम है,
दर्द का जो स्वाद है,
उससे दिल आबाद है।

मदहोशियों का माहौल हैं
बहरूपियों की यहां फौज हैं,
पराया यहां,
किस -किस को कहें,
अपनों की जरा खोज है,

बैचेनियां, तन्हाईयां,
बदनामियां!
आजाद हैं,
दर्द का जो स्वाद है,
उससे दिल आबाद है।

Comments

4 responses to “दर्द का जो स्वाद है”

  1. लाजवाब✍✍✍ 👌👌👌

  2. मोहन सिंह मानुष Avatar
    मोहन सिंह मानुष

    आप सभी का हार्दिक धन्यवाद 🙏🙏

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