दाग

तुम कहती हो तो मान लेता हूँ
कि
दाग अच्छे हैं।
किन्तु सच यह है कि
दाग अच्छे होते नहीं हैं।
एक बार लग जाने के बाद
कहाँ धुल पाते हैं दाग
जब दाग लग ही गया
तब फिर
कौन मानता है बेदाग।

—- डॉ0 सतीश पाण्डेय, चम्पावत

Comments

12 responses to “दाग”

  1. Anita Sharma

    Nice

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद

    1. Satish Pandey

      धन्यवाद जी

      1. Abhishek kumar

        वेलकम

  2. MS Lohaghat

    बहुत खूब, आप कम लिखते हैं, पर सटीक लिखते हैं। कविता कम से कम 6-8 लाइन हो तो तभी कविता लगती है। एक दो कविताएं हो पर सटीक हों।

    1. Satish Pandey

      जी सर

    1. Satish Pandey

      Thank you

    1. Satish Pandey

      aabhaar

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