लेख:- आत्महत्या

शीर्षक:- “जीने का लें संकल्प, आत्महत्या नहीं है विकल्प”

आत्महत्या यानी खुद ही खुद की हत्या कर लेना।अपने आप ही अपने प्राण ले लेना अर्थात् आत्महत्या कर लेना उचित नहीं है।

आत्महत्या एक जघन्य अपराध है।ईश्वर के द्वारा दिये गये अनमोल जीवन की लीला समाप्त कर लेना, एक अनुचित कार्य है।

सभी के जीवन में ऐसी परिस्थितियाँ कभी न कभी अवश्य उत्पन्न हो जाती हैं, जब व्यक्ति को उन समस्याओं से निकलने का कोई भी मार्ग दिखायी नहीं देता।वह कुंठाग्रस्त होकर मानसिक तनाव भी सहन करता है।परन्तु तब उसका धैर्य व शिक्षा ही उसे जीवन का मार्ग दिखाते हैं।

वर्तमान आर्थिक युग में बहुत सी समस्यायें हमनें खुद भी तैयार कर ली है।पश्चिमी सभ्यता के अनुसरण, दिखावे के प्रचलन और झूठी प्रतिस्पर्धा के कारण हम नित नवीन समस्याओं में उलझ जाते हैं।

आज की जिन्दगी में कुछ भी स्थिर नहीं है।विश्वासघात, राजनीति और रिश्तों की अस्थिरता हमारे जीवन का अंग बन चुके हैं।कभी रोजगार में उच्च लक्ष्य प्राप्ति, ज्यादा मुनाफ़े की चाह भी हमें चिंताग्रस्त करती है।

कभी पारिवारिक कलह भी हमे बहुत कष्ट देती है।आज प्रत्येक व्यक्ति स्वंतंत्र रहना चाहता है तथा अपने हिसाब से अपना जीवन जीने की चाह रखता है।किसी का तनिक भी हस्तक्षेप उसे बर्दाश्त नहीं होता।

आज की शिक्षित युवा पीढ़ी स्वछन्द मानसिकता का अनुसरण करती है।उनमें मिथ्याभिमान असीमित है।माँ- बाप की डाट बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होती और वे तुरंत ही आत्महत्या का रास्ता अपना लेते हैं।

समाचार पत्रों में किसान, मजदूर या गरीब व्यक्ति की भूख व कर्ज से परेशान होकर आत्महत्या करने की खबर छपती ही रहती है।जिन्हें पढ़कर हम दुखी होते हैं और उनके दर्द का एहसास करते हैं।
किन्तु अब तो
शिक्षित,उच्च पदों पर सुशोभित अधिकारी, खिलाड़ी और अभिनेता भी आत्महत्या कर रहे हैं।जिसका प्रमुख कारण अपनी क्षमता से उच्च लक्ष्य निर्धारण व दिखावे का अनुसरण माना जा सकता है।

विपरीत परिस्थितियों में हमेशा अपने से नीचे जीवन स्तर के व्यक्ति को देखें।वह कैसे जीवन जी रहा है।वह अगर खुश है तो आप भी खुश रह सकते हैं।जीवन में उतार-चढ़ाव लाजमी है।

यदि पारिवारिक कलह घोर समस्या के रूप में सामने आ जाये तो आप उस स्थान को छोड़कर अन्यत्र अपना नव जीवन प्रारंभ करे।यदि आत्महत्या का मन में विचार आये तो अपनी माँ को याद करें जिसने नौ महीने आपको कोख में रखा, सारे दर्द सहे तब आपको ईश्वर प्रदत्त यह अनमोल जीवन प्राप्त हुआ।
यदि आप अपनी आत्महत्या करते हैं तो आप स्वयं के साथ पूरे परिवार की हत्या कर देते हैं।आप के जाने के बाद आपके परिवार मे सिर्फ जिन्दा लाशें होती हैं।

आत्महत्या ही सभी समस्याओं का हल नहीं है।यह कायरता की निशानी है।जो व्यक्ति अपनी परिस्थितियों से सामना नहीं कर सकता, वह अपने परिवार व देश के लिये तो फिर कुछ नहीं कर सकता।
आप निर्भीक साहसी व पराक्रमी हैं या ड़रपोक, भीरू व कमजोर इसका निर्धारण केवल जीवन के उतार- चढ़ाव व विपरीत परिस्थितियों में आपको स्वयं ही करना है।आप जीवन के महत्व को समझे।
जीवन एक युद्ध का मैदान है और आप उसके नायक हैं।मैने सुना है कि नायक कभी मैदान छोड़कर नहीं भागते।

लेखक:-
अभिषेक कुमार शुक्ला (सहायक अध्यापक)
प्राथमिक विद्यालय लदपुरा
जिला- पीलीभीत (उत्तर प्रदेश)

Comments

15 responses to “लेख:- आत्महत्या”

  1. Rajiv Mahali Avatar
    Rajiv Mahali

    आपकी बातें बहुमूल्य हैं
    आशा है, जीवन के मोल हम सभी समझे

    1. थैंक्स फॉर कमेंट्स

  2. यह बात सुशांत जी को समझनी चाहिए थी ।
    और हम सभी को भी।
    उच्चकोटि का लेख।

  3. क्या खूब कहा
    आत्महत्या नहीं है विकल्प,
    जीने का लें संकल्प
    सुन्दर विचार

  4. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    सुन्दर अभिव्यक्ति

  5. Abhishek kumar

    🙏🙏

  6. बहुत ही प्रेरणादायक

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