12 Comments

  1. बहुत सुन्दर हास्य रचना। श्रृंगारमयी चुहलबाजियों का बहुत ही सुंदर चित्रण। कथात्मक शैली में कवि गीता जी ने बेहतरीन हास्य कविता का सृजन किया है।
    रसोई में गई,चाकू उठाया
    कलाई की नस पे लगाया,
    और बोली…………..
    तारीफ़ करते हो, या काट दूं …
    हा हा हा, क्या प्रस्तुति है,

    1. बहुत सारा धन्यवाद सतीश जी आपकी यही हंसी आज की बेहतरीन समीक्षा है ।”हास्य कविता”, …ये लिखे बिना ही आपको हंसी आई बहुत अच्छा लगा ।सुंदर समीक्षा के लिए बहुत बहुत शुक्रिया ..

    1. आज तो आपकी हंसी ही मेरी समीक्षा है कमला जी बहुत बहुत धन्यवाद
      आप ऐसे ही हंसती रहें ।

Leave a Reply