दिल में सिर्फ राम है

राम हैं दयाल जग मैं, राम ही कृपाल हैं
राम ही कवच हैं मेरे, राम मेरी ढाल हैं..

जिसका एक बाण सागरों को भी सुखा सके,
कोई कण नही कि जिसमे राम ना समा सकें ।

माथे पर तिलक का वो निशान लौट आया है,
हिंदुओं का फिर से स्वाभिमान लौट आया है।

राम श्रेष्ठ न्यायकर्ता,राम न्याय कर चले,
सदियों युद्ध में थे, आज राम अपने घर चले ।

पत्थरों को तार दे, सामर्थ्य मेरे राम में,
राम मुझमे हैं सदा ही, मैं सदा हूँ राम में ।

दिल में रख कपट जो मुख पे रखते राम नाम है,
राम उसके ही हैं कि जिसके दिल में सिर्फ राम हैं..

राम उसके ही हैं जिसके दिल में सिर्फ राम हैं..

– ‘प्रयाग धर्मानी’

Comments

12 responses to “दिल में सिर्फ राम है”

  1. Rajiv Mahali Avatar
    Rajiv Mahali

    सुन्दर

    1. बहुत शुक्रिया

    1. धन्यवाद आपका

  2. बहुत सुन्दर

    1. धन्यवाद आपका

  3. Geeta kumari

    बहुत सुंदर रचना

    1. Prayag Dharmani

      धन्यवाद आपका

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