खुशियों का मतलब पटाखे नहीं,
रोशनी और उल्लास है।
ना समझो गलत बंद करना इन्हें,
प्रदूषण का यह सब सामान है।
पहले ही प्रदूषण से बेदम है आबोहवा
उस पर इस दिन चहु ओर
फैला होता बस धुआं धुआं
हफ्तों तक पटाखों की धुंध में
धूयेऔर घुटन से दम निकला ही जाता है।
निमिषा सिंघल
दिवाली और पटाखे
Comments
13 responses to “दिवाली और पटाखे”
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वाह
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Thanks dear
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Wah
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Thank you
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Wah
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Thanks dear
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Nice
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धन्यवाद आपको
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Wah
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Thank you
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वाह बहुत सुंदर
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Good
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सुन्दर
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