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  1. प्रात: काल की बेला का बहुत ही सुन्दर और मनोहारी दृश्य का चित्रण प्रस्तुत किया है कवि सतीश जी ने ।”सुबह-सुबह की लालिमा बिखरी हुई है सब तरफ ओस की बूंद मोती सी” ऊषा काल पर बहुत
    सुन्दर कविता

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