5 Comments

  1. दीप ऐसा जलाओ ऐ दिलबर
    हर तरफ रौशनी -रौशनी हो।
    न अमावस की हो रात काली
    हर निशा चांदनी -चांदनी हो।।
    वाह वाह, शास्त्री जी बहुत खूब

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