दुआओं की पोटली

खुश रहो कहकर,
दुआओं की पोटली
माता-पिता ने,
चुपके से सर पर छोड़ी।
पता भी न चलने दिया,
हर बार यही किया।
और हम नासमझ,
ज़िंदगी भर कामयाबी को,
अपना मुकद्दर मानते रहे।।
_____✍️गीता

Comments

8 responses to “दुआओं की पोटली”

  1. वाह, सच में बहुत सुन्दर कहा।

    1. धन्यवाद अनु जी

  2. माता-पिता का आशिर्वाद होता ही ऐसा है। कवि गीता जी की कलम ने बहुत सुंदर प्रस्तुति दी है। वाह, अति उत्तम रचना।

    1. Geeta kumari

      इस सुंदर एवम् उत्साह वर्धक समीक्षा हेतु आपका हार्दिक धन्यवाद सतीश जी,अभिवादन सर

    1. धन्यवाद पीयूष जी

  3. बहुत ही सुंदर बात कही है

    1. Geeta kumari

      धन्यवाद प्रज्ञा जी

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