दुनियां जो कहती, कहने दे

ओ कर्मनिष्ठ! तू दुःखी न हो
खुद की क्षमता की कर पहचान
दुनियां जो कहती, कहने दे
उसकी बातों को मत दे कान।

Comments

3 responses to “दुनियां जो कहती, कहने दे”

    1. सादर धन्यवाद

  1. Ramu Kharkwal

    वाह

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