दुनिया भयी बाबरी

कोरोना बीमारी के लगातार बढने के बावजूद किसी भी तरह की कोई सावधानी लेने से लोग परहेज कर रहे हैंं
यह ऐसा समय है जब सबको अपने और अपने परिवार का ख्याल रखना चाहिये और हर संभव सावधानी रखनी चाहिये
लेकिन लोग सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते हुये, बेपरवाह, बिना किसी काज के घूमते आपको हर जगह मिल जायेंगे, इसी स्थिति पर दो लाइन प्रस्तुत हैं –

दुनिया भयी बाबरी, छोड़ समझ को संग
बैठ के देखत रहो, अब तरह तरह के रंग

Comments

9 responses to “दुनिया भयी बाबरी”

  1. देवेश साखरे 'देव' Avatar

    समसामयिक परिस्थिति पर बिलकुल सही पंक्तियाँ

  2. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    विचारणीय तथ्य

  3. Praduman Amit

    पंक्तियां अच्छी है।

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