कोरोना बीमारी के लगातार बढने के बावजूद किसी भी तरह की कोई सावधानी लेने से लोग परहेज कर रहे हैंं
यह ऐसा समय है जब सबको अपने और अपने परिवार का ख्याल रखना चाहिये और हर संभव सावधानी रखनी चाहिये
लेकिन लोग सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाते हुये, बेपरवाह, बिना किसी काज के घूमते आपको हर जगह मिल जायेंगे, इसी स्थिति पर दो लाइन प्रस्तुत हैं –
दुनिया भयी बाबरी
दुनिया भयी बाबरी, छोड़ समझ को संग
Comments
9 responses to “दुनिया भयी बाबरी”
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समसामयिक परिस्थिति पर बिलकुल सही पंक्तियाँ
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shukriya
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विचारणीय तथ्य
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thanks
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पंक्तियां अच्छी है।
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shukriya
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वाह
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shukriya
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👏👏
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