देख सखी आए हैं जवांई

मंजुल रूप लेकर, देख सखी आए हैं जवांई।
रौनक लग गई मेरे घर पर,
बजने लगे ढ़ोल शहनाई
आया घोड़ी पे सवार ,वो बांका कुमार,
लाने मेरी बिटिया के जीवन में बहार
देख के उसको बिटिया, धीरे से मुस्काई,
थोड़ी सी शरमाई, थोड़ी सी सकुचाई
खुशियों की लाली उसके मुखड़े पे छाई,
वो विनीत है, वो विनम्र है, लोग कहें मेहमान है
पर मेरे लिए वो पुत्र के समान है।
मांग उसके नाम की सजाती है जो,
करता उसका सम्मान है।
खुश रखता है निज पत्नी को,
मुझे उस पर अभिमान है।
अपनी लाडो को दे के उसके साए में,
मेरे दिल को सुकून है, दिमाग को आराम है।

Comments

13 responses to “देख सखी आए हैं जवांई”

  1. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    Nice

  2. Satish Pandey

    पारिवारिक जीवन की सुंदरता का मनोहारी चित्रण किया गया है

  3. Geeta kumari

    आभर सहित धन्यवाद🙏

  4. रिश्तो की बागडोर को संभालती हुई रचना बहुत ही सहायता से कवित्री ने अपने भावों को प्रकट किया है तथा पारिवारिक स्थिति को बयां किया है

  5. Satish Pandey

    वाह बहुत सुंदर पंक्तियाँ

  6. Geeta kumari

    आभार🙏

  7. Devi Kamla

    Very nice

    1. Geeta kumari

      Thank you ji

  8. Piyush Joshi

    गजब पंक्तियाँ

    1. Geeta kumari

      Thank you very much Piyush ji 🙏

  9. Indu Pandey

    nice poem

    1. Geeta kumari

      Thank you very much Indu ji 🙏

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