देर नहीं लगती

देर नहीं लगती

कोई क्यों इतना एहसान फरमा रहा,
कुछ तो है जो संग आ रहा
खाली जेब को,
कभी किसी की नजर नहीं लगती ,
रिश्ते कब मतलबी हो जाए ,
देर नहीं लगती।

ऐसे ही छोड़ जाएगी,
मिनटों में दिल तोड़ जाएगी,
इतनी भी वह मुझको फरेबी,
खैर नहीं लगती।
पर बहुत जुड़ते- टूटते रिश्ते; आजकल!
बात कब बिगड़ जाए,
देर नहीं लगती।

संगदिल है सब,
हमदर्द हैं सब ,
तेरे सुख के हर पलों में,
पर यह क्या हुआ ?
दुख में तू अकेला !
टूटा सा कोई जैसे ठेला!
वक्त की कड़वी गोली ,
सबक से कम नहीं लगती
कब ?कौन ?कहां?
हाथ छोड़ दे,
देर नहीं लगती।

Comments

10 responses to “देर नहीं लगती”

  1. सटीक अभिव्यक्ति

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar

      धन्यवाद प्रभु 🙏

  2. Rajiv Mahali Avatar
    Rajiv Mahali

    सुन्दर

    1. मोहन सिंह मानुष Avatar
      मोहन सिंह मानुष

      🙏

  3. Praduman Amit

    बहुत खूब।

  4. सुन्दर स्वाभविक

  5. Pratima chaudhary

    बहुत ही उम्दा

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