दोस्ती ना सही,
दुश्मनी तो मत निभाओ।
चार बातें बनाकर,
यूं ठहाके तो मत लगाओ।
यूं तो दिल सबका दुखता है,
उसे और ना दुखाओ।
माना तुम काबिल हो ,
अपने मुकाम पर।
मगर मेरी काबिलियत पर ,
यू सवाल ना उठाओ ।
दोस्ती ना सही…
Comments
12 responses to “दोस्ती ना सही…”
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क्या बात है! दमदार
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हार्दिक धन्यवाद
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अतिसुंदर
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धन्यवाद
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मार्मिक रचना
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Thank you
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Nice lines
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धन्यवाद
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शानदार
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धन्यवाद सर
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काबिलियत तो इंसान में है इतनी,
कि जननत भी झुका दे.
एक बार पहचान ले अपनी काबिलियत,
तो कुदरत भी हिला दे।
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आपकी काबिलियत आपको
कभी नहीं हराएगी-

बहुत सुंदर विचार
बहुत बहुत धन्यवाद
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