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  1. नव किसलय तरुवर सजा, चहुदिश नव उल्लास।
    जनम मास है राम की, नौराता भी खास।।
    _______ हिंदू नव वर्ष और नवरात्रि के अवसर पर कवि विनय चंद शास्त्री जी की अति सुंदर रचना, उम्दा लेखन

  2. अपना पराया ना करो,राखो हृदय उदार।
    आदर कर सब धर्म का, भूल न निज व्यवहार ।।५।।

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