अबला नहिं सबला हुई, घर से पंख पसार
बैठी है सर्वोच्च पद, देख रही संसार
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नारी से दुनिया चले, नारी है बलवान
पूजा होती है जहां, रहते हैं भगवान्
दोहे =नारी
Comments
3 responses to “दोहे =नारी”
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वाह
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नारी के सम्मान में सुंदर अभिव्यक्ति
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नारियों का सशक्त रूप प्रस्तुत करती हुई आपकी कविता, बहुत सुंदर 👌
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