अश्कों के समंदर में ए खुदा
मुझे सिर्फ दो गज ज़मीन दे दे।
गर करने लगे वह अपनो से बेवफ़ाई
तब,ज़माना मुझे उसी में दफ़ना दे।।
दो गज़ ज़मीन
Comments
10 responses to “दो गज़ ज़मीन”
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बहुत खूब
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Thanks
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वाह
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Welcome Sir
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बहुत खूब भाई जी
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समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।
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वाह वाह, बहुत सुंदर पंक्तियां
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शुक्रिया अमिता जी।
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क्या बात है बहुत खूबसूरत
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आपकी समीक्षा के लिए बेताब रहता हूँ।
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