दो गज़ ज़मीन

अश्कों के समंदर में ए खुदा
मुझे सिर्फ दो गज ज़मीन दे दे।
गर करने लगे वह अपनो से बेवफ़ाई
तब,ज़माना मुझे उसी में दफ़ना दे।।

Comments

10 responses to “दो गज़ ज़मीन”

    1. Praduman Amit

      Thanks

    1. Praduman Amit

      Welcome Sir

  1. बहुत खूब भाई जी

    1. Praduman Amit

      समीक्षा के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

  2. Amita Gupta

    वाह वाह, बहुत सुंदर पंक्तियां

    1. Praduman Amit

      शुक्रिया अमिता जी।

  3. क्या बात है बहुत खूबसूरत 

    1. Praduman Amit

      आपकी समीक्षा के लिए बेताब रहता हूँ।

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