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  1. बगीचे में खिलता रहूँ।
    महक बिखेरता रहूँ,
    प्रेम सहेजता रहूँ।
    *****
    कवि सतीश पाण्डेय जी की अति सुंदर और शानदार कविता

  2. जैसा भी दिखूँ
    एक दिखूँ,
    नेक रहूँ।
    न किसी से ठेस लूँ,
    न किसी को ठेस दूँ।
    बिंदास गति में बहती
    नदी सा
    चलता रहूँ।
    _______ नेक रास्ते पर निर्बाध गति से चलने की प्रेरणा देती हुई कवि सतीश जी की अति उत्तम रचना। अति उत्तम अभिव्यक्ति सुंदर शिल्प और श्रेष्ठ लेखन

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