7 Comments

  1. वाह
    अधर्म का हो खत्म राज
    धर्म को विजय मिले,
    बहुत ही शानदार सर, वाह क्या बात है। आप चाहें तो इस बेहतरीन कविता को पोएट्री ऑन पिक्चर काव्य प्रतियोगिता में भी डाल सकते हैं। उम्दा रचना है सर।

  2. “,धनुष उठाएं रामचंद्र विश्व को निर्भय मिले।दैत्य दम्भ खत्म होअहं कीबात दूर हो,घमण्ड भूमि पर गिरे,बचे जो बेकसूर हो।” वाह, कवि सतीश जी की बेहद शानदार और जबरदस्त रचना । आजकल के राक्षसों को,मार गिराने की संपूर्ण योजना है इस कविता में । समाज को ऐसे ही साहित्य की आवश्यकता है आज के दौर में ।बहुत बढ़िया सर
    और मैं भी पीयूष जी की बात से सहमत हूं कि आप इसे पोएट्री ऑन पिक्चर काव्य प्रतियोगिता में भी डाल सकते हैं ।ये एक सुझाव है हो सकता है आपके पास इससे भी अच्छी कविता हो

Leave a Reply