धन्य है किसान तू
जो उगाता अन्न है,
भाव है जो दान का
उसमें तू ही सम्पन्न है।
खोद कर माटी
डाल कर के बीज उसमें
तूने उगाया, खिलाया
तू तो सचमुच धन्य है।
रात दिन जी-तोड़ मेहनत
खाद, पानी, धूप, बारिश
इन सभी में रम गया तू,
कर्तव्य पथ पर जम गया तू,
तूने उगाया हमने खाया,
भूख को अपनी मिटाया,
जी गए मेहनत से तेरी
जी का सहारा है दिलाया।
धन्य है किसान तू
जो उगाता अन्न है,
भाव है जो दान का
उसमें तू ही सम्पन्न है।
धन्य है किसान तू
Comments
5 responses to “धन्य है किसान तू”
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धन्य है किसान तू
जो उगाता अन्न है,
भाव है जो दान का
उसमें तू ही सम्पन्न है।
खोद कर माटी
डाल कर के बीज उसमें
तूने उगाया, खिलाया…
_____ किसानों की मेहनत को दर्शाती हुई कवि सतीश जी की अति उत्तम रचना बहुत सुंदर भाव और शिल्प लिए हुए एक श्रेष्ठ प्रस्तुति -

किसानों पर अति सुंदर कविता
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अति सुंदर रचना
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बहुत खूब
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किसानो पर सुंदर भाव
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