समय बदल गया , बदल गया दुनिया का दस्तूर। आज धरा मां पुकार रही होकर के मजबूर ।कभी सेहेती थी वाहन देती थी सारे सुख भरपूर । आज धरा मां पुकार रही हो कर के मजबूर । हे पृथ्वी पुत्रो ! जाग जाओ छोड़ो आलस और गुरुर , कभी वह आपने पुत्रो को लेकर के गोद में करती थी सुख भरपूर आज धरा मां पुकार रही हो कर के मजबूर
धरा की पुकार
Comments
13 responses to “धरा की पुकार”
-

सुंदर अभिव्यक्ति
-

Thank you di
-
-

bahut accha lge raho🤗🤗
-

Thank you bahin
-
-
सुन्दर अभिव्यक्ति
-

Thank you sir
-
-

Nice
-

Thank you bhai
-
-

बहुत खूब
-

Thank you di
-
-
सुंदर
-

Thank you sir ji
-
-

Thank you bhai
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.