धर्म आंतरिक जागृति है

धर्म आंतरिक जागृति है
संवेदना का अहसास है
अंतर्मन अगर साफ है
मजहब हमेशा पास है

शांति संदेश के लिए समूह
प्रेम का एकल स्वतंत्र विचार है
जीवन सरल सीमित सबका
भंडारण के लिए आचार है

ईश्वर से पा पा जीवन भर
देना जिसको आ जाता है
जीना उसी का सार्थक हुआ
जी ना अपनों से चुराता है

धर्म श्रेष्ठ जो प्रेम सिखाए
सहयोग राह पर हमें चलाए
संगठन का नित पाठ पढ़ाए
सहृदय बना देश रक्षा कराये

सर्वहित के लिए हमे जोड़े
कर्मठ बना पहल को मोड़ें
सत्यपथ पर सदा सुदृढ़ रखे
संस्कृति के लिए हमें परखे

Comments

5 responses to “धर्म आंतरिक जागृति है”

  1. अंतर्मन अगर साफ है
    मजहब हमेशा पास है
    बहुत सुंदर

  2. Geeta kumari

    सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने को प्रेरित करती हुई बहुत सुंदर और प्रेरक रचना है, उम्दा लेखन

  3. vikash kumar

    Great poem

  4. धर्म आंतरिक जागृति है
    संवेदना का अहसास है
    अंतर्मन अगर साफ है
    मजहब हमेशा पास है

    शांति संदेश के लिए समूह
    प्रेम का एकल स्वतंत्र विचार है
    जीवन सरल सीमित सबका
    भंडारण के लिए आचार है

    बहुत ही उचित कहा आपने
    संस्कृति है जीवन का आधार

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