धर्म आंतरिक जागृति है
संवेदना का अहसास है
अंतर्मन अगर साफ है
मजहब हमेशा पास है
शांति संदेश के लिए समूह
प्रेम का एकल स्वतंत्र विचार है
जीवन सरल सीमित सबका
भंडारण के लिए आचार है
ईश्वर से पा पा जीवन भर
देना जिसको आ जाता है
जीना उसी का सार्थक हुआ
जी ना अपनों से चुराता है
धर्म श्रेष्ठ जो प्रेम सिखाए
सहयोग राह पर हमें चलाए
संगठन का नित पाठ पढ़ाए
सहृदय बना देश रक्षा कराये
सर्वहित के लिए हमे जोड़े
कर्मठ बना पहल को मोड़ें
सत्यपथ पर सदा सुदृढ़ रखे
संस्कृति के लिए हमें परखे
Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.