चारो तरफ कयामत ही कयामत है।
जिधर देखो करोना के ही क़हर है।।
महामारी में जी रहे है हम और आप।
फिर भी उम्मीद के किरण जलाए बैठे है।।
आज नहीं तो कल होंगे कामयाब हम।
बस कुछ और धैर्य रखने की जरूरत है ।।
धैर्य
Comments
10 responses to “धैर्य”
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nice
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Thanks
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nice
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Thanks
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Nice
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Thanks
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पंक्तिबद्धता नहीं बनी
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बहुत खूब
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achchha prayas
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यही है अमित जी और बहुत संकटकालीन स्थिति है
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