सुबह की, किरण हो नई रोशनी हो,
बहारों भरी हो, नई रोशनी हो।
जिन्हें रात भर चैन की नींद आयी,
उन्हें जगमगाती, नई रोशनी हो।
बिखरते हुये दिल अंधेरा घिरा हो,
उन्हें राह देती, नई रोशनी हो।
युवा नव दिशा में कदम को बढ़ाये,
पथों का उजाला, नई रोशनी हो।
नई रोशनी हो
Comments
8 responses to “नई रोशनी हो”
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Very very nice poem
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बहुत खूब, बहुत ही लाजवाब सर
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बहुत खूब, बहुत बढ़िया
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बहुत खूब, अतीव सुन्दर
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Nice line
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कवि सतीश जी की बहुत ही खूबसूरत रचना, बहुत ही सुंदर धुन है कविता की । सुबह की किरण, नई रोशनी, वाह बहुत ही ख़ूबसूरत
अंदाज़ और अल्फ़ाज़ से सुशोभित बहुत ही शानदार प्रस्तुति -

शानदार कविता
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बहुत खूब
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