वह सोचता है,
यदि रूठ जाऊं
तो वो मुझे मनाये
वो सोचती है रूठने पर
वो मुझे मनाये,
एक सोचता है
दूसरा मुझे मनाये
रूठने पर
न वो मनाती है
न वो मनाता है,
रूठना भी रूठ जाता है,
समय छूट जाता है
बहुत पीछे………
नयन नीर सींचे न सींचे..
प्यार सूखा रह जाता है….
नयन नीर सींचे न सींचे..
Comments
14 responses to “नयन नीर सींचे न सींचे..”
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वाह सर, अतीव सुन्दर
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बहुत बहुत धन्यवाद
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बहुत ही शानदार
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धन्यवाद जी
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बहुत ख़ूब
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बहुत बहुत धन्यवाद
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अतिसुंदर भाव
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सादर धन्यवाद
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Bahut he sunder prastuti
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बहुत बहुत आभार
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अतिसुंदर
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सादर आभार
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अति सुंदर
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बहुत बहुत धन्यवाद
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