नया सवेरा नई उमंगें

नया सवेरा नई उमंगें
छोड़ो मन की सभी उलझनें,
बीते बातें एक तरफ कर
जीतो, पा लो नई मंजिलें।
रात निराशा की थी जो भी
बीत गई सो बात गई,
अब वो सारा दर्द भुला दो
गूंजे कुछ आवाज नई।
आशा की इक नई किरण से
ओस बूंद सुखें आखों में
उड़ने की फिर से बेचैनी
साफ दिखे तेरे पाँखों में।
नया सवेरा नई उमंगें
छोड़ो मन की सभी उलझनें,
बीते बातें एक तरफ कर
जीतो, पा लो नई मंजिलें।

Comments

11 responses to “नया सवेरा नई उमंगें”

  1. बहुत ही प्रेरक कविता वाह सर वाह

    1. बहुत बहुत धन्यवाद जोशी जी

  2. Geeta kumari

    “आशा की एक नई किरण से, ओस बूंद सूखे आंखों में कि, फिर से बेचैनी ,साफ दिखे तेरी पांखों में ” जीवन जीने के सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाती हुई बेहद शानदार रचना । कवि सतीश जी ने पहले की कुछ नाकाम कोशिश को भूलने की सलाह देते हुए आगे भविष्य की ओर पूरे उत्साह से कदम बढ़ाने की प्रेरणा दी है । काबिले तारीफ़ रचना ।

    1. कविता के भाव का इतनी खूबसूरती से विश्लेषण करने हेतु आपको हार्दिक धन्यवाद है गीता जी। वास्तव में आप श्रेष्ठ समीक्षक हैं। बहुत सारा आभार

      1. Geeta kumari

        बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी

  3. बहुत ही प्रेरक कविता वाह

    1. सादर धन्यवाद जी

  4. Pt, vinay shastri ‘vinaychand’

    वाह वाह बहुत सुंदर भाव

    1. बहुत बहुत धन्यवाद शास्त्री जी

  5. बहुत ही सुंदर भाव, सुंदर कविता

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